Monday, 30 March 2015

माणुस (1)

माणुस प्रेमाच्या शोधात
प्रेम माणसाच्या आत।
जरा उघड तु  दार
मनी मायेचा सागर।
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माणुस धावला किती
त्याची वेळ सांगती।
माणुस दमला किती
त्याच्या धापा सांगती।
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माणुस खाई भाकरी
करुनी देशाची चाकरी।
देई दुध ,भात ,खवा
त्याची परदेशी सेवा।
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